Friday, 22 August 2025

प्रमेह -मधुमेह prediabetes-#diabetes

 आयुर्वेद के मत से प्रमेह होने के कारण क्या हैं?(#Prediabetic)


1)बीजदोष से (Genetic) 

2) अपथ्य आहार विहार से 

*******

जात: प्रेमही मधुमेहिनो वा न साध्य उक्त: स हि बीजदोषात् ------------------  असाध्यान् ll चरक चि 6/57

  व्दौप्रमेहौ भवत: सहजो s पथ्य निमित्तश्च ll सुश्रुत चि 11/3

**********


1)बीजदोष(Genetic)- माता पिता के बीज मे प्रमेह करनेवाले दोष के कारण बच्चे को जन्मजात मधुमेह हो जाता हैं l 


2) अपथ्य आहार विहार से 

–--------- तेषां मेदो मूत्र कफा वहम् ll 1ll

अन्नपानक्रियाजातं यत् प्रायस्तत्प्रवर्तकम् l


प्राय: जो आहार विहार मेद (fat), कफ और मूत्र को बढाने वाले होते हैं वो सब प्रमेह को उत्पन्न करने वाले हैं l 

जैसे -मीठा, खट्टा, नमकीन, स्निग्ध पदार्थ, पचन होने मे भारी पदार्थ, चिकने, ठंडे पदार्थ 

नये धान्य, सुरा, जलचर प्राणी के मांस, गुड, दूध, दुधसे बने पदार्थ

—--- एक स्थान पर बैठे रहना , सोने का कोई नियम ना होना l

***********


प्रमेह के लक्षण:- 

सभी प्रमेह का सामान्य लक्षण प्रभूत अविल मूत्रता हैl 

प्रभूत मात्रा मे  और अविल याने रंग मे मलिन, मूत्र प्रवृत्ती होना l

*************

आयुर्वेद मे 20प्रकारके प्रमेह बताये हैं l


अगर प्रमेह की ठीक से चिकित्सा नहीं की तो सभी 20प्रमेह , मधुमेह में बदल जाते हैं l 


मधुमेह मे मध के समान मूत्रप्रवृत्ति होती हैं l

मधु याने मध/शहद 

मेह याने मूत्रप्रवृत्ति 

***********


प्रमेह पूर्वरूप :- प्रमेह होने के पहिले शरीर में कुछ लक्षण उत्पन्न होते है, उसे प्रमेह के पूर्वरुप कहते हैं l


पूर्वरुप:-

—- पसीना आना, शरीर दुर्गंधी, शरीर मे ढीलापन , आराम करना, बैठे रहना,नींद , सुखी जीवन की इच्छा होना l

—----- हृदय, आँखें, जीभ , कान मे अधिक मल तयार होना, शरीर भारी लगना 

--- केश और नख बहुत जलद गती से बढना ,

----  ठंडी चीजें बहुत पसंद होना ,

---- गले और तालु में सुखापन, मुख में मीठापन ,

--- हाथ पैर में जलन, मूत्र पर चिटियों का आना 


ये सब लक्षण भविष्य में प्रमेह होने के संकेत देते हैं l

************

मधुमेह शरीर में किस प्रकार से उत्पन्न होता हैं?, (#etiopathology of diabetes)


मधुमेह दो प्रकार से उत्पन्न होता हैं l


,”मधुमेहो मधुसमं, जायते स किल द्विधा ll 18ll

क्रुद्धे धातु क्षयाद्वायौ दोषा वृतपथेsथवा l”

 अष्टांग हृदय निदानस्थान 10



1) हमारा शरीर रस रक्त मांस मेद अस्थि मज्जा शुक्र ये सात धातु से बना हैं l ये धातु का पोषण अंश की कमी के कारण उनका क्षय होता हैं l 

धातुक्षय के कारण वात बढता हैं, विपरीत कार्य करने लगता हैं l धातुक्षय के कारण क्रुद्ध हुवा वात मूत्राशय को दूषित करता हैं और प्रमेह का कारण बनता हैं l

यह प्रमेह ठीक नहीं होता l


2) अत्यधिक पोषण युक्त, मीठा आदी अन्न खाना, सोने का नियम नहीं होना, आलस से जीवन बिताना आदी कफ, मेद, मूत्र बढाने वाले कारणों से ,

वात पित्त कफ जिस मार्ग से शरीर में बहते हैं उस मार्ग मे बाधा ,अवरोध  हो जाता हैं l

बाधा होने के कारण वायु क्रुद्ध होकर बस्ती/मूत्राशय को दूषित कर  प्रमेह उत्पन्न करता हैं l


इस प्रकार मे अगर मेद (fat) बहुत दूषित नहीं हुई हो तो यह प्रमेह ठीक होता हैं 


साध्यास्तु मेदो यदी नातिदुष्टम् ll41ll अष्टांग हृदय निदानस्थान 10 


**************

आयुर्वेदिक उपचार - अष्टांग हृदय चिकित्सा स्थान 12


प्रमेह रोगी बलवान है तो सर्व प्रथम वमन विरेचन दे l

मसाज के लिये दोष के अनुसार तेल का चयन करे l

वमन विरेचन होने के बाद वात पित्त कफ के अनुसार औषधी काढे का बस्ति दे l


शरीर शुद्ध होने पर मांस सूप/ सत्तू दे l पुन्हा व्याधी न बढे उसके लिये औषध,आहार,विहार के नियम का पालन करे l


**अगर रोगी बलवान नहीं हैं तो वमन,विरेचन नहीं करना सब रोगी को औषध दे l


औषधी:-प्रमेह के लिए अनेक प्रकार के औषधि हैं l

जैसे 

 -आँवले के रस मे हल्दी मिलाकर थोडा शहद मिलाकर सुबह खाली पेट ले l

- गिलोय के रस मे शहद मिलाकर दे l

- वात पित्त कफ के अनुसार परीक्षण करके औषध का चयन किया जाता हैं l

- नवयास चूर्ण 

- धान्वंतर घृत खाने के लिये बरते

- शुद्ध शिलाजीत शास्त्रोक्त नियम से सेवन करे

- प्रमेह मे उद्वर्तन ( रुक्ष चुर्ण मसाज), भरपूर व्यायाम, रात्री जागरण, कफ व मेद (fat) नष्ट करनेवाले औषध और क्रिया करे

– प्रमेह रोगी अगर कृश हैं तो मेद एवं मूत्र न बढे इस प्रकार का आहार और औषधी देकर पुष्ट करे, वजन 

बढाये l

***********

मधु मेहित्व मापन्नो भिषग्भि: परिवर्जित: ll 43 ll

शिला जतुतुलामद्यात्प्र मेहार्त:  पुनर्नव: ll 44 lllअष्टांग हृदय चिकित्सा स्थान 12


मधुमेह की अवस्था मे, वैद्य ने भी ठीक न हो पाएगा, असाध्य कह कर रोगी को छोड दिया हो , फिर भी शिलाजीत विधिवत प्रमाण मे खाने से उसका शरीर फिर से नया हो जाता हैं l

***”************

टीप:- आयुर्वेद मे prediabetic के पहले की अवस्था जिसे प्रमेह के पूर्वरुप कहा हैं, अगर यह लक्षण उत्पन्न हो तो तुरंत आहार विहार और औषध के द्वारा प्रमेह -  मधुमेह को रोका जा सकता हैं l

******”*******

Vd Pratibha Bhave 

MD Ayurveda 

Sukhkarta Ayurvedic Panchkarma and fertility center Pune

8766740253

No comments:

Post a Comment

Regimen of diet according to Ayurveda (भोजन करण्याचे आयुर्वेदोक्त नियम)

1) काले – Food should be taken at the proper time, 2)   सात्म्ये-food should be familial, acceptable  3) शुचि – it should be clean 4) हितं -...