जब पित्त शरीर में संतुलित स्थिती में रहता है
तो शरीर के लिये उपयोगी काम करता हैं l
असंतुलित होने पर बीमारियों को पैदा करता हैं l
संतुलित पित्त के कार्य:-
आहार का पाचन करना
आखों से देखना
शरीर की उष्मा उचित मात्रा मे बनाये रखना
शरीर का प्राकृत वर्ण बनाये रखना
शौर्य, हर्ष,उत्साह, मानसिक प्रसन्नता
असंतुलित पित्त के कार्य:-
आहार का पाचन न होना
ठीक से दिखाई न देना
कभी बहुत उष्मा या बहुत कम उष्मा होना
वर्ण विकार उत्पन्न होना
डर लगना, भयभीत होना,
क्रोध बढना, मोह उत्पन्न होना, उत्साह न होना,
खिन्न रहना , उदास रहना
संदर्भ:- च. सूत्रस्थान 12/11
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Vd Pratibha Bhave
Sukhkarta Ayurvedic Panchkarma and fertility center Pune
8766740253
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