मलप्रवृत्ती का स्वरुप जाठराग्नि याने पाचक अग्नि पर निर्भर होता है l
निर्बल अग्नि को बढाने के लिये घृत (घी) स्नेहो मे श्रेष्ठ है l
“स्नेहमेव परं विद्या विद्याद् दुर्बलानलदीपनम् ll “
अष्टांग संग्रह चि.10/68
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1)मलप्रवृत्ती पतली हो तो :-
अग्नि मंद होने के कारण,कफ की कमी से
मल अच्छा पक्व होने के बाद भी मलप्रवृत्ती पतली हो तो
सेंधा नमक और सोंठ घी में मिला ले l
इस घी को खाना खाते समय थोडा थोडा पिये l
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2) मलप्रवृत्ती कठिन हो तो:-
जो व्यक्ती मल कठिन होने के कारण दुःख पूर्वक मलत्याग करता है तो
सब 5प्रकार के नमक में घृत मिला ले,
भोजन के मध्य मे इस घृत को पिये l
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संदर्भ अष्टांग संग्रह चि.10/69,70,71
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वैद्य प्रतिभा भावे
8766740253
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